सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ

दोहा ११३ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ गुन भवन अमान। कामरूप इच्छामरन ग्यान बिराग निधान॥ ११३ (क) ॥

अर्थ

तुम सदा श्रीरामजी को प्रिय होओ और कल्याणरूप गुणों के धाम, मानरहित, इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ, इच्छामरण, ज्ञान और वैराग्य के भण्डार होओ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का दोहा ११३ (क) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह