निज कर कमल परसि मम सीसा

चौपाई ८, दोहा ११३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

निज कर कमल परसि मम सीसा। हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा॥ राम भगति अबिरल उर तोरें। बसिहि सदा प्रसाद अब मोरें॥ ८ ॥

अर्थ

मुनीश ने अपने कर-कमलों से मेरा सिर स्पर्श करके हर्षित होकर आशीर्वाद दिया कि अब मेरी कृपा से तेरे हृदय में सदा प्रगाढ़ रामभक्ति बसेगी।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह