सब उदार सब पर उपकारी
सब उदार सब पर उपकारी
चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सब उदार सब पर उपकारी। बिप्र चरन सेवक नर नारी॥ एकनारि ब्रत रत सब झारी। ते मन बच क्रम पति हितकारी॥ ४ ॥
अर्थ
सभी नर-नारी उदार हैं, सभी परोपकारी हैं और सभी ब्राह्मणों के चरणों के सेवक हैं। सभी पुरुषमात्र एकपत्नीव्रती हैं। इसी प्रकार स्त्रियाँ भी मन, वचन और कर्म से पति का हित करनेवाली हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन