सब कर मत खगनायक एहा

चौपाई ७, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सब कर मत खगनायक एहा। करिअ राम पद पंकज नेहा॥ श्रुति पुरान सब ग्रंथ कहाहीं। रघुपति भगति बिना सुख नाहीं॥ ७ ॥

अर्थ

हे पक्षिराज! उन सबका मत यही है कि श्रीरामजी के चरणकमलों में प्रेम करना चाहिये। श्रुति, पुराण और सभी ग्रंथ कहते हैं कि श्रीरघुनाथजी की भक्ति के बिना सुख नहीं है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।

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भजन महिमा