कमठ पीठ जामहिं बरु बारा
कमठ पीठ जामहिं बरु बारा
चौपाई ८, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कमठ पीठ जामहिं बरु बारा। बंध्यासुत बरु काहुहि मारा॥ फूलहिं नभ बरु बहुबिधि फूला। जीव न लह सुख हरि प्रतिकूला॥ ८ ॥
अर्थ
कछुए की पीठ पर भले ही बाल उग आवें, बाँझ का पुत्र भले ही किसी को मार डाले, आकाश में भले ही अनेकों प्रकार के फूल खिल उठें; परन्तु श्रीहरि से विमुख होकर जीव सुख नहीं प्राप्त कर सकता।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।
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भजन महिमा