बिमल ग्यान जल जब सो नहाई

चौपाई ६, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

बिमल ग्यान जल जब सो नहाई। तब रह राम भगति उर छाई॥ सिव अज सुक सनकादिक नारद। जे मुनि ब्रह्म बिचार बिसारद॥ ६ ॥

अर्थ

निर्मल ज्ञान-रूपी जल में स्नान कर लेने पर तब उसके हृदय में रामभक्ति छा जाती है। शिवजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, सनकादि और नारद आदि ब्रह्मविचार में परम निपुण जो मुनि हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।

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भजन महिमा