सब कै निंदा जे जड़ करहीं
सब कै निंदा जे जड़ करहीं
चौपाई १४, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सब कै निंदा जे जड़ करहीं। ते चमगादुर होइ अवतरहीं॥ सुनहु तात अब मानस रोगा। जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा॥ १४ ॥
अर्थ
जो मूर्ख मनुष्य सबकी निन्दा करते हैं, वे चमगादड़ होकर जन्म लेते हैं। हे तात! अब मानस-रोग सुनिये, जिनसे सब लोग दुःख पाते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १४, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर