मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला
मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला
चौपाई १५, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला। तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला॥ काम बात कफ लोभ अपारा। क्रोध पित्त नित छाती जारा॥ १५ ॥
अर्थ
सब रोगों की जड़ मोह (अज्ञान) है। उन व्याधियों से फिर और बहुत-से शूल उत्पन्न होते हैं। काम वात है, लोभ अपार कफ है और क्रोध पित्त है जो सदा छाती जलाता रहता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १५, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर