रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर

दोहा ७६ · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर। उर आयत भ्राजत बिबिधि बाल बिभूषन चीर॥ ७६ ॥

अर्थ

उदर पर सुन्दर तीन रेखाएँ (त्रिवली) हैं, नाभि सुन्दर और गहरी है। विशाल वक्षःस्थल पर अनेकों प्रकार के बालविभूषण और वस्त्र सुशोभित हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ७६ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा