रामचरित सर गुप्त सुहावा

चौपाई ६, दोहा ११३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

रामचरित सर गुप्त सुहावा। संभु प्रसाद तात मैं पावा॥ तोहि निज भगत राम कर जानी। ताते मैं सब कहेउँ बखानी॥ ६ ॥

अर्थ

हे तात! यह सुन्दर और गुप्त रामचरित सर मैंने शंभु की कृपा से पाया था। तुम्हें श्रीरामजी का निज भक्त जानकर ही मैंने तुमसे सब चरित्र विस्तार के साथ कहा।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह