मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा
मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा
चौपाई ५, दोहा ११३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा। रामचरितमानस तब भाषा॥ सादर मोहि यह कथा सुनाई। पुनि बोले मुनि गिरा सुहाई॥ ५ ॥
अर्थ
मुनि ने कुछ समय तक मुझको वहाँ (अपने पास) रखा। तब उन्होंने रामचरितमानस वर्णन किया। आदरपूर्वक मुझे यह कथा सुनाकर फिर मुनि मुझसे सुन्दर वाणी बोले--
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
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लोमशजी से शाप और अनुग्रह