राम सुनहु मुनि कह कर जोरी
राम सुनहु मुनि कह कर जोरी
चौपाई २, दोहा ४८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
राम सुनहु मुनि कह कर जोरी। कृपासिंधु बिनती कछु मोरी॥ देखि देखि आचरन तुम्हारा। होत मोह मम हृदयँ अपारा॥ २ ॥
अर्थ
मुनि ने हाथ जोड़कर कहा—हे कृपासागर श्रीरामजी! मेरी कुछ विनती सुनिये! आपके आचरणों (मनुष्योचित चरित्रों) को देख-देखकर मेरे हृदय में अपार मोह (भ्रम) होता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।
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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण