एक बार बसिष्ट मुनि आए
एक बार बसिष्ट मुनि आए
चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए॥ अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा॥ १ ॥
अर्थ
एक बार मुनि वसिष्ठजी वहाँ आये जहाँ सुन्दर सुख के धाम श्रीरामजी थे। श्रीरघुनाथजी ने उनका बहुत ही आदर-सत्कार किया और उनके चरण धोकर चरणामृत लिया।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।
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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण