राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग

दोहा २१ · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं। काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं॥ २१ ॥

अर्थ

[काकभुशुण्डिजी कहते हैं--] हे पक्षिराज गरुड़जी! सुनिये। श्रीराम के राज्य में जड़, चेतन सारे जगत् में काल, कर्म, स्वभाव और गुणों से उत्पन्न हुए दुःख किसी को भी नहीं होते (अर्थात् इनके बन्धन में कोई नहीं है)।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का दोहा २१ है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।

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रामराज्य का वर्णन