भूमि सप्त सागर मेखला
भूमि सप्त सागर मेखला
चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
भूमि सप्त सागर मेखला। एक भूप रघुपति कोसला॥ भुअन अनेक रोम प्रति जासू। यह प्रभुता कछु बहुत न तासू॥ १ ॥
अर्थ
अयोध्या में श्रीरघुनाथजी सात समुद्रों की मेखला (करधनी) -वाली पृथ्वी के एकमात्र राजा हैं। जिनके एक-एक रोम में अनेकों ब्रह्माण्ड हैं, उनके लिये सात द्वीपों की यह प्रभुता कुछ अधिक नहीं है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन