राम कृपाँ नासहिं सब रोगा

चौपाई ३, दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

राम कृपाँ नासहिं सब रोगा। जौं एहि भाँति बनै संजोगा॥ सदगुर बैद बचन बिस्वासा। संजम यह न बिषय कै आसा॥ ३ ॥

अर्थ

यदि श्रीरामजी की कृपा से इस प्रकार का संयोग बन जाय तो ये सब रोग नष्ट हो जायँ। सद्गुरु-रूपी वैद्य के वचन में विश्वास हो। विषयों की आशा न करे, यही संयम (परहेज) हो।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।

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भजन महिमा