पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ
पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ
चौपाई १, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ। जौं कृपाल मोहि ऊपर भाऊ॥ नाथ मोहि निज सेवक जानी। सप्त प्रस्न मम कहहु बखानी॥ १ ॥
अर्थ
पक्षिराज गरुड़जी फिर प्रेमसहित बोले--हे कृपालु ! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक जानकर मेरे सात प्रश्नों के उत्तर बखानकर कहिये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर