पुनि कृपाल पुर बाहेर गए

चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि कृपाल पुर बाहेर गए। गज रथ तुरग मगावत भए॥ देखि कृपा करि सकल सराहे। दिए उचित जिन्ह जिन्ह तेइ चाहे॥ २ ॥

अर्थ

और फिर कृपालु श्रीरामजी नगर के बाहर गये और वहाँ उन्होंने हाथी, रथ और घोड़े मँगवाये। उन्हें देखकर, कृपा करके प्रभु ने सबकी सराहना की और उनको जिस-जिस ने चाहा, उस-उस को उचित जानकर दिया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।

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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण