अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए
अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए
चौपाई १, दोहा ५० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए। कृपासिंधु के मन अति भाए॥ हनूमान भरतादिक भ्राता। संग लिए सेवक सुखदाता॥ १ ॥
अर्थ
ऐसा कहकर मुनि वसिष्ठजी घर आये। वे कृपासागर श्रीरामजी के मन को बहुत ही अच्छे लगे। तदनन्तर सेवकों को सुख देनेवाले श्रीरामजी ने हनुमानजी तथा भरतजी आदि भाइयों को साथ लिया।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।
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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण