प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम

दोहा ५१ · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम। सोभासिंधु हृदयँ धरि गए जहाँ बिधि धाम॥ ५१ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के गुणसमूहों का प्रेमपूर्वक वर्णन करके मुनि नारदजी शोभाके समुद्र को हृदय में धरकर जहाँ ब्रह्मलोक है वहाँ चले गये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “नारद की स्तुति और प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ५१ है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद द्वारा श्रीराम के दर्शन, स्तुति-गान और ब्रह्मलोक प्रस्थान का वर्णन है।

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नारद की स्तुति और प्रस्थान