प्रातकाल सरऊ करि मज्जन

चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन॥ बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं॥ १ ॥

अर्थ

प्रातःकाल सरयू में स्नान करके ब्राह्मणों और सज्जनों के साथ सभाँ में बैठते हैं। वसिष्ठजी वेद और पुराणों का वर्णन करते हैं और श्रीरामजी सुनते हैं, यद्यपि वे सब जानते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन