अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं
अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं
चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं। देखि सकल जननीं सुख भरहीं॥ भरत सत्रुहन दोनउ भाई। सहित पवनसुत उपबन जाई॥ २ ॥
अर्थ
वे भाइयों को साथ लेकर भोजन करते हैं। उन्हें देखकर सभी माताएँ आनन्द से भर जाती हैं। भरतजी और शत्रुघ्नजी दोनों भाई हनुमानजी सहित उपवनों में जाते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन