ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन
दोहा २५ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार। सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार॥ २५ ॥
अर्थ
जो ज्ञान, वाणी, गोतीत, अज, माया, मन और गुणों के पार हैं, वही सच्चिदानन्दघन भगवान् श्रेष्ठ नर चरित करते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का दोहा २५ है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन