प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा

चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा॥ सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी॥ ३ ॥

अर्थ

[सबसे] पहले मुनि वसिष्ठजी ने तिलक किया। फिर उन्होंने सब ब्राह्मणों को [तिलक करने की] आज्ञा दी। पुत्र को राजसिंहासन पर देखकर माताएँ हर्षित हुईं और उन्होंने बार-बार आरती उतारी।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति