जनकसुता समेत रघुराई
जनकसुता समेत रघुराई
चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जनकसुता समेत रघुराई। पेखि प्रहरषे मुनि समुदाई॥ बेद मंत्र तब द्विजन्ह उचारे। नभ सुर मुनि जय जयति पुकारे॥ २ ॥
अर्थ
श्रीजानकीजी के सहित श्रीरघुनाथजी को देखकर मुनियों का समुदाय अत्यन्त ही हर्षित हुआ। तब ब्राह्मणों ने वेदमन्त्रों का उच्चारण किया। आकाश में देवता और मुनि “जय हो, जय हो” ऐसी पुकार करने लगे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।
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राम राज्याभिषेक और स्तुति