प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही
प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही
चौपाई २, दोहा १२३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही। मोहि से सठ पर ममता जाही॥ तुम्ह बिग्यानरूप नहिं मोहा। नाथ कीन्हि मो पर अति छोहा॥ २ ॥
अर्थ
प्रभु श्रीरघुनाथजी को छोड़कर और किसका सेवन (भजन) किया जाय, जिनका मुझ जैसे मूर्ख पर भी ममत्व (स्नेह) है। हे नाथ! आप विज्ञान-रूप हैं, आपको मोह नहीं है। आपने तो मुझ पर बड़ी कृपा की है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति