पूँछिहु राम कथा अति पावनि
पूँछिहु राम कथा अति पावनि
चौपाई ३, दोहा १२३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
पूँछिहु राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि॥ सत संगति दुर्लभ संसारा। निमिष दंड भरि एकउ बारा॥ ३ ॥
अर्थ
जो आपने मुझसे शुकदेवजी, सनकादि और शिवजी के मन को प्रिय लगनेवाली अति पवित्र रामकथा पूछी। संसार में घड़ीभर का अथवा पलभर का एक बार का भी सत्संग दुर्लभ है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति