प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी

चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित बियोग बिपति सब नासी॥ प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी॥ २ ॥

अर्थ

प्रभु को देखकर अयोध्यावासी हर्षित हुए। वियोग से उत्पन्न सब विपत्तियाँ नष्ट हो गईं। प्रेमातुर सब लोगों को देखकर कृपालु खरारी श्रीरामजी ने कौतुक किया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप