अमित रूप प्रगटे तेहि काला

चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अमित रूप प्रगटे तेहि काला। जथा जोग मिले सबहि कृपाला॥ कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी। किए सकल नर नारि बिसोकी॥ ३ ॥

अर्थ

उसी समय कृपालु श्रीरामजी असंख्य रूपों में प्रकट हो गये और सब से [एक ही साथ] यथायोग्य मिले। कृपादृष्टि से रघुवीर ने सब नर-नारियों को शोक से रहित कर दिया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप