नीति निपुन सोइ परम सयाना

चौपाई २, दोहा १२७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

नीति निपुन सोइ परम सयाना। श्रुति सिद्धांत नीक तेहिं जाना॥ सोइ कबि कोबिद सोइ रनधीरा। जो छल छाड़ि भजइ रघुबीरा॥ २ ॥

अर्थ

जो छल छोड़कर श्रीरघुवीर का भजन करता है, वही नीति में निपुण है, वही परम बुद्धिमान् है। उसी ने वेदों के सिद्धान्त को भलीभाँति जाना है। वही कवि, वही विद्वान् तथा वही रणधीर है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति