नित नइ प्रीति राम पद पंकज

चौपाई ५, दोहा १५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

नित नइ प्रीति राम पद पंकज। सब कें जिन्हहि नमत सिव मुनि अज॥ मंगन बहु प्रकार पहिराए। द्विजन्ह दान नाना बिधि पाए॥ ५ ॥

अर्थ

श्रीरामजी के चरणकमलों में—जिन्हें श्रीशिवजी, मुनिगण और ब्रह्माजी भी नमस्कार करते हैं—सब की नित्य नवीन प्रीति है। भिक्षुकों को बहुत प्रकार के वस्त्राभूषण पहनाये गये और ब्राह्मणों ने नाना प्रकार के दान पाये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति