बिरति बिबेक भगति दृढ़ करनी
बिरति बिबेक भगति दृढ़ करनी
चौपाई ४, दोहा १५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
बिरति बिबेक भगति दृढ़ करनी। मोह नदी कहँ सुंदर तरनी॥ नित नव मंगल कौसलपुरी। हरषित रहहिं लोग सब कुरी॥ ४ ॥
अर्थ
यह वैराग्य, विवेक और भक्ति को दृढ़ करनेवाली है तथा मोहरूपी नदी के [पार करने के] लिये सुन्दर नाव है। कौसलपुरी में नित-नये मंगलोत्सव होते हैं। सभी वर्गों के लोग हर्षित रहते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।
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राम राज्याभिषेक और स्तुति