ब्रह्मानंद मगन कपि सब कें प्रभु
ब्रह्मानंद मगन कपि सब कें प्रभु
दोहा १५ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
ब्रह्मानंद मगन कपि सब कें प्रभु पद प्रीति। जात न जाने दिवस तिन्ह गए मास षट बीति॥ १५ ॥
अर्थ
वानर सब ब्रह्मानन्द में मग्न हैं। प्रभु के चरणों में सब का प्रेम है! उन्हें दिन-रात का पता ही नहीं चला और [बात की बात में] छः महीने बीत गये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का दोहा १५ है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।
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राम राज्याभिषेक और स्तुति