निज उर माल बसन मनि बालितनय
निज उर माल बसन मनि बालितनय
दोहा १८ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराइ। बिदा कीन्हि भगवान तब बहु प्रकार समुझाइ॥ १८ (ख) ॥
अर्थ
तब भगवान ने अपने हृदय की माला, वस्त्र और मणि बालि-पुत्र अंगद को पहनाकर और बहुत प्रकार से समझाकर उनकी विदाई की।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का दोहा १८ (ख) है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।
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वानरों की और निषाद की विदाई