अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना

दोहा १८ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना सींव। प्रभु उठाइ उर लायउ सजल नयन राजीव॥ १८ (क) ॥

अर्थ

अंगद के विनम्र वचन सुनकर करुणा की सीमा प्रभु श्रीरघुनाथजी ने उनको उठाकर हृदय से लगा लिया। प्रभु के नेत्रकमलों में [प्रेमाश्रुओं का] जल भर आया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का दोहा १८ (क) है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।

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वानरों की और निषाद की विदाई