नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य

दोहा १२१ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान। भेषज पुनि कोटिन्ह नहिं रोग जाहिं हरिजान॥ १२१ (ख) ॥

अर्थ

नियम, धर्म, आचार, तप, ज्ञान, यज्ञ, जप, दान तथा और भी करोड़ों औषधियाँ हैं, परन्तु हे हरिजान! उनसे ये रोग नहीं जाते।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का दोहा १२१ (ख) है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर