एक ब्याधि बस नर मरहिं ए

दोहा १२१ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

एक ब्याधि बस नर मरहिं ए असाधि बहु ब्याधि। पीड़हिं संतत जीव कहुँ सो किमि लहै समाधि॥ १२१ (क) ॥

अर्थ

एक ही रोग के वश होकर मनुष्य मर जाते हैं, फिर ये तो बहुत-से असाध्य रोग हैं। ये जीव को निरन्तर कष्ट देते रहते हैं, ऐसी दशा में वह समाधि (शान्ति) को कैसे प्राप्त करे?

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का दोहा १२१ (क) है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर