नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं
चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं॥ मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई। सोउ मोरें मन संसय अहई॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! मैंने शिवजी से ऐसा सुना है कि महाप्रलय में भी आपका नाश नहीं होता और ईश्वर कभी मिथ्या वचन कहते नहीं। वह भी मेरे मन में सन्देह है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा