अग जग जीव नाग नर देवा

चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा॥ अंड कटाह अमित लयकारी। कालु सदा दुरतिक्रम भारी॥ ४ ॥

अर्थ

[क्योंकि] हे नाथ! नाग, मनुष्य, देवता आदि चर-अचर जीव तथा यह सारा जगत् काल का कलेवा है। असंख्य ब्रह्माण्डों का नाश करनेवाला काल सदा बड़ा ही अनिवार्य है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा