मुनि मानस पंकज भृंग भजे

छन्द ९, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

छन्द पाठ

मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे॥ तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी॥ ९ ॥

अर्थ

हे मुनियों के मनरूपी कमल के भ्रमर! हे महान् रणधीर एवं अजेय श्रीरघुवीर! मैं आपको भजता हूँ (आपकी शरण ग्रहण करता हूँ)। हे हरि! आपका नाम जपता हूँ और आपको नमस्कार करता हूँ। आप जन्म-मरणरूपी रोग की महान् औषध और अभिमान के शत्रु हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द ९, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति