करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ
छन्द ८, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
छन्द पाठ
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ॥ सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही॥ ८ ॥
अर्थ
वे प्रेमपूर्वक नियम लेकर निरन्तर शुद्ध हृदय से आपके चरणकमलों की सेवा करते रहते हैं और निरादर और आदर को समान मानकर वे सब संत सुखी होकर पृथ्वी पर विचरते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द ८, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।
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राम राज्याभिषेक और स्तुति