मुदिताँ मथै बिचार मथानी
मुदिताँ मथै बिचार मथानी
चौपाई ८, दोहा ११७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
मुदिताँ मथै बिचार मथानी। दम अधार रजु सत्य सुबानी॥ तब मथि काढ़ि लेइ नवनीता। बिमल बिराग सुभग सुपुनीता॥ ८ ॥
अर्थ
तब मुदिता (प्रसन्नता) रूपी कमोरी में तत्त्वविचाररूपी मथानी से दम (इन्द्रिय-दमन) के आधार पर (दमरूपी खंभे आदि के सहारे) सत्य और सुन्दर वाणीरूपी रस्सी लगाकर उसे मथे और मथकर तब उसमें से निर्मल, सुन्दर और अत्यन्त पवित्र वैराग्यरूपी मक्खन निकाल ले।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ११७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
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ज्ञान और भक्ति की महिमा