मरकत मृदुल कलेवर स्यामा

चौपाई ३, दोहा ७६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

मरकत मृदुल कलेवर स्यामा। अंग अंग प्रति छबि बहु कामा॥ नव राजीव अरुन मृदु चरना। पदज रुचिर नख ससि दुति हरना॥ ३ ॥

अर्थ

मरकत मणि के समान हरिताभ श्याम और कोमल शरीर है। अंग- अंग में बहुत-से कामदेवों की शोभा है। नवीन [लाल] कमल के समान लाल-लाल कोमल चरण हैं। सुन्दर अंगुलियाँ हैं और नख अपनी ज्योति से चन्द्रमा की कान्ति को हरनेवाले हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा