मनजात किरात निपात किए

छन्द ४, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

छन्द पाठ

मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए॥ हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे॥ ४ ॥

अर्थ

कामदेवरूपी भील ने मनुष्यरूपी हिरनों के हृदय में कुभोगरूपी बाण मारकर उन्हें गिरा दिया है। हे नाथ! हे [पाप-ताप का हरण करनेवाले] हरे! उसे मारकर विषयरूपी वन में भूले पड़े हुए इन पामर अनाथ जीवों की रक्षा कीजिये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द ४, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति