बहु रोग बियोगन्हि लोग हए

छन्द ५, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

छन्द पाठ

बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए॥ भव सिंधु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते॥ ५ ॥

अर्थ

लोग बहुत-से रोगों और वियोगों (दुःखों) से मारे हुए हैं। ये सब आपके चरणों के निरादर के फल हैं। जो मनुष्य आपके चरणकमलों में प्रेम नहीं करते, वे अथाह भवसागर में पड़े हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द ५, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति