महि मंडल मंडन चारुतरं

छन्द ३, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

छन्द पाठ

महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं॥ मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी॥ ३ ॥

अर्थ

आप पृथ्वी-मण्डल के अत्यन्त सुन्दर आभूषण हैं; आप श्रेष्ठ बाण, धनुष और तरकस धारण किये हुए हैं। महान् मद, मोह और ममता रूपी रात्रि के अन्धकार-समूह के नाश के लिये आप सूर्य के तेजोमय किरण-समूह हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द ३, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति