मामवलोकय पंकज लोचन

चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

मामवलोकय पंकज लोचन। कृपा बिलोकनि सोच बिमोचन॥ नील तामरस स्याम काम अरि। हृदय कंज मकरंद मधुप हरि॥ १ ॥

अर्थ

कृपापूर्वक देख लेने मात्र से शोक के छुड़ानेवाले हे कमलनयन ! मेरी ओर देखिये (मुझपर भी कृपादृष्टि कीजिये)। हे हरि! आप नील कमल के समान श्यामवर्ण और कामदेव के शत्रु महादेवजी के हृदयकमल के मकरन्द (प्रेम-रस) के पान करनेवाले भ्रमर हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “नारद की स्तुति और प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद द्वारा श्रीराम के दर्शन, स्तुति-गान और ब्रह्मलोक प्रस्थान का वर्णन है।

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नारद की स्तुति और प्रस्थान