जातुधान बरूथ बल भंजन
जातुधान बरूथ बल भंजन
चौपाई २, दोहा ५१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जातुधान बरूथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन॥ भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक॥ २ ॥
अर्थ
आप राक्षसों की सेना के बल को तोड़नेवाले हैं। मुनियों और संतजनों को आनन्द देनेवाले और पापों के नाश करनेवाले हैं। ब्राह्मणरूपी खेती के लिये आप नये मेघसमूह हैं और शरणहीनों को शरण देनेवाले तथा दीन जनों को अपने आश्रय में ग्रहण करनेवाले हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “नारद की स्तुति और प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद द्वारा श्रीराम के दर्शन, स्तुति-गान और ब्रह्मलोक प्रस्थान का वर्णन है।
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नारद की स्तुति और प्रस्थान