महिमा नाम रूप गुन गाथा

चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

महिमा नाम रूप गुन गाथा। सकल अमित अनंत रघुनाथा॥ निज निज मति मुनि हरि गुन गावहिं। निगम सेष सिव पार न पावहिं॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी की महिमा, नाम, रूप और गुणों की कथा सभी अपार एवं अनन्त हैं तथा श्रीरघुनाथजी स्वयं भी अनन्त हैं। मुनिगण अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार श्रीहरि के गुण गाते हैं। निगम, शेष और शिव भी उनका पार नहीं पाते।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा