दससीस बिनासन बीस भुजा

छन्द २, दोहा १४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

छन्द पाठ

दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा॥ रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे॥ २ ॥

अर्थ

हे दस सिर और बीस भुजाओंवाले रावण का विनाश करके पृथ्वी के सब महान् रोगों (कष्टों) को दूर करनेवाले श्रीरामजी! राक्षस-समूह रूपी जो पतंगे थे, वे सब आपके बाणरूपी अग्नि के प्रचण्ड तेज से भस्म हो गये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का छन्द २, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति